वायरल Fever के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज | Latest News 2022

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वायरल Fever के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज |

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आम तौर पर वायरल फीवर मौसम के बदलने पर प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने पर होता है। लेकिन इसके सिवा और भी कारण होते है जिनके कारण बुखार आता है।

  • दूषित जल एवं भोजन का सेवन
  • प्रदूषण के कारण दूषित वायु में मौजूद सूक्ष्म कणों का शरीर के भीतर जाना
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी
  • वायरल बुखार हुए रोगी के साथ रहना

वायरल फीवर होने के लक्षण

वायरल फीवर के लक्षण (viral fever symptoms in hindi) सामान्य रूप से होने वाले बुखार की तरह ही लेकिन इसको नजरअन्दाज करने से अवस्था गंभीर हो सकती है।

क्योंकि इलाज के अभाव में वायरस के पनपने की संभावना रहती है। यह हवा और पानी से फैलने वाला संक्रमण है, यह बरसात के मौसम में ज्यादा होता है।

वायरल संक्रमण किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन बच्चों में यह अधिक देखा जाता है। मौसम में बदलाव आने के कारण बच्चों में वायरल बुखार होने की संभावना ज्यादा होती है।

क्योंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह से विकसित नहीं होती। ऐसे में बच्चों में थकावट, खाँसी, संक्रामक जुकाम, उल्टी, दस्त जैसे लक्षण (viral fever symptoms in hindi) देखने को मिलते है और तापमान अधिक होने के कारण डिहाइड्रेशन भी हो सकता है।

इसके अलावा और भी कुछ आम लक्षण होते हैं

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  • थकान
  • पूरे शरीर में दर्द होना
  • शरीर का तापमान बढ़ना
  • खाँसी
  • जोड़ो में दर्द
  • दस्त
  • त्वचा के ऊपर रैशेज होना
  • सर्दी लगना
  • गले में दर्द
  • सिर दर्द
  • आँखों में लाली तथा जलन रहना।
  • उल्टी और दस्त का होना।
  • वायरल बुखार ठीक होने में 5-6 दिन भी लग जाते है। शुरूआती दिनों में गले में दर्द, थकान, खाँसी जैसी समस्या होती (viral fever ke lakshan) है।

वायरल फीवर से बचाव के उपाय

  • खाने में उबली हुई सब्जियां, हरी सब्जियां खाना चाहिए।
  • दूषित पानी एवं भोजन से बचें।
  • पानी को पहले उबाल कर थोड़ा गुनगुना ही पिएँ।
  • वायरल बुखार से ग्रस्त रोगी के सम्पर्क में आने से बचें।
  • मौसम में बदलाव के समय उचित आहार-विहार का पालन करें।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनायें रखने के लिए आयुर्वेदिक उपचार एवं अच्छी जीवन शैली को अपनायें।

वायरल बुखार से छुटकारा पाने के घरेलू नुस्ख़े

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आम तौर पर वायरल फीवर राहत पाने के लिए घरेलू नुस्ख़ो को ही अपनाया जाता है। इनमें वह चीजें होती हैं जो आसानी से घर में मिला जायें या उसको इस्तेमाल करने का तरीका आसान हो। चलिये इनके बारे में विस्तृत से जानते हैं।

वायरल बुखार एक वायरस से संक्रमित समस्या है अत इसमें एंटीबायोटिक नहीं देनी चाहिए। यह बुखार कस से कम 3-4 दिन तथा ज्यादा से ज्यादा दो सप्ताह तक रह सकता है। वायरल बुखार के लिए आयुर्वेदीय चिकित्सा श्रेष्ठ है, यह कूपित दोषों को समावस्था में लेकर आती है।

मेथी का पानी वायरल फीवर में फायदेमंद 

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मेथी के दानों को एक ग्लास पानी में डालकर रात भर के लिए छोड़ दें और सुबह इस पानी को छानकर रख लें। इस पानी का सेवन हर दो घंटे में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में करें।

वायरल बुखार में धनिया का सेवन है फायदेमंद

धनिया के बीज वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली की शक्ति को बढ़ाते है। धनिया में पाया जाने वाला वाष्पशील तेल प्रभावी रूप से वायरल फीवर को ठीक करता है।

किशमिश वायरल बुखार में फायदेमंद

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एक कप पानी में दो छोटी चम्मच किशकिश डालें और फूलने दें। आधे घंटे के बाद इसे इसी पानी में पीस लें और छान लें और इसमें आधे नींबू का रस मिलाकर पी लें।

गिलोय वायरल फीवर से राहत दिलाने में मददगार

एक अंगुल मोटी या 4-6 लम्बी गिलोय को लेकर 400 मि.ली. पानी में उबालें। 100 मि.ली. शेष रहने तक इस उबालें और पिएँ। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है तथा बार-बार होने वाली सर्दी-जुकाम व बुखार (giloy for viral fever) नहीं होते।

लहसुन का तेल वायरल फीवर के दौरान के बदन दर्द से दिलाये राहत

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वायरल बुखार होने अंगों में दर्द एवं ऐंठन होने लगती है ऐसे में लहसुन के साथ पकाए हुए सरसों के तेल से हाथ-पैरों में मालिश (viral fever treatment) करें।

हल्दी और सोंठ पाउडर से दूर करें वायरल बुखार

हल्दी और सोंठ के पाउडर में इम्यूनिटी बढ़ाने  वाला गुण होता है और इसी गुण के कारण इस मिश्रण का सेवन वायरल फीवर के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। अगर आप वायरल बुखार से पीड़ित हैं तो किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेकर हल्दी और सोंठ पाउडर का सेवन करें।

 

Read Also –आमतौर पर बुखार कई तरीकों को होता है। जिनमें से 3 मुख्य माने जाते हैं। पहला शरीर में दर्द होना, दूसरा कफ बढ़ने और तीसरा पित्त बढ़ने के कारण आता है। कई बार शरीर में तेज दर्द, अकड़न की समस्या हो जाती है।

 

Read Also – हर साल इस्लामिक कैलेंडर की शुरुआत की डेट बदलती रहती है। इस्लामिक कैलेंडर (Islamic Calender) को हिजरी कैलेंडर भी कहा जाता है और यह ग्रेगोरियन कैलेंडर से करीब 11 दिन छोटा होता है।