Sushma Swaraj Death Anniversary: सुषमा स्वराज को क्यों कहा गया ‘सुपरमॉम ऑफ इंडिया’? | Latest News 2022

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सुषमा स्वराज
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Sushma Swaraj Death Anniversary: सुषमा स्वराज को क्यों कहा गया ‘सुपरमॉम ऑफ इंडिया’? | Latest News 2022

2014 से 2019 तक अपने 5 साल के कार्यकाल में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 186 देशों में फंसे 90 हजार से ज्यादा भारतीय लोगो की मदद की. बीते कुछ महीने पहले जब यूक्रेन और रूस के बीच जंग छिड़ी तो भी वहां फंसे भारतीयों को सुषमा स्वराज ही याद आईं। 

सुषमा स्वराज
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सुषमा स्वराज की गिनती उन राजनेताओं में की जाती है जिन्होंने अपने कार्यकाल के टाइम अपने भाषण से देश-दुनिया में अलग ही पहचान बनाई. और सरहद पार लोगों की मदद करने में हमेशा आगे रहीं. विदेशी मंत्री रहते हुए उन्होंने UN बहुत अहम मुद्दों को भी उठाया और मानवीय दृष्टिकोण के बहुत अनुपम उदाहरण भी पेश किए।

संस्कृत और पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन करने वालीं पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को सुपरमॉम ऑफ इंडिया भी बोला जाता है. वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने आर्टिकल में उन्हें ये नाम भी दिया था. ये नाम भी देते हुए आर्टिकल में इसकी बहुत सी वजह भी बनाई गई थीं।

आज सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि है. इस मौके पर जानिए की उन्हें देश की सुपरमॉम क्यों बोला जाता है और कैसे मिला उनको ये नाम

सुषमा स्वराज
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5 साल में 90 हजार से ज्यादा भारतीयों की मदद की सुषमा स्वराज ने 

सुषमा स्वराज ऐसी राजनेता रहीं है जिनके काम करने के कुछ खास अंदाज के कारण हाई प्रोफाइल माना जाने वाला विदेश मंत्रालय भारतीयों का मंत्रालय के नाम से भी जाना गया था . जिसका असल मकसद विदेश में मुश्किलों का सामना कर रहे भारतीयों को बचाना भी रहा . 2014 से 2019 तक अपने 5 साल के कार्यकाल में उन्होंने 186 देशों में फंसे 90 हजार से भी ज्यादा भारतीयों की मदद भी की।

और पिछले कुछ महीने पहले जब यूक्रेन और रूस के बीच जंग छिड़ी तो भी वहां पर फंसे भारतीयों को सुषमा स्वराज ही याद आईं. उन्होंने लिखा, कैसे वो एक ट्वीट पर विदेश में फंसे भारतीय को लाने के लिए विमान भी भेज देती थीं।

ऐसे मिला नाम सुपरमॉम

पीएम नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में उन्होंने विदेश मंत्री पद पर रहते हुए देश और दुनिया का दिल भी जीत लिया था ,और सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने संकट में फंसे प्रवासी भारतीयों को मदद पहुंचाकर मानवता का अपना फर्ज भी अदा किया।

सुषमा स्वराज
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अपने कार्यकाल के टाइम उन्होंने बोला था कि अगर आप मंगल ग्रह पर भी फंस गए हैं तो भी भारतीय दूतावास आपकी मदद के लिए आगे आएगा. और उन्होंने जैसा बोला था वैसा ही किया भी. सोशल मीडिया पर लोगों की गुहार सुनने और उनकी मदद करने के कारण वॉशिंगटन पोस्ट ने उन्हें सुपरमॉम का नाम भी दे दिया. पाकिस्तान हो या यमन के युद्ध में फंसे भारतीय, सभी की सुरक्षित वापसी भी कराई।

भारतीयों के लिए रुकवा दी थी जंग

2015 में यमन में यमन में सऊदी गठ बंधन सेना और हूती विद्रोहियों के बीच भी जंग चल रही थी.इस टाइम यमन में बहुत भारतीय कामगार फंस गए थे. उन्होंने सुषमा स्वराज से मदद की गुहार भी लगाई. जंग के बीच किसी भी देश के विमान के लिए वहां पहुंचना बिलकुल भी संभव नहीं था. ऐसे में सुषमा स्वराज की पहल के बाद भारतीय सरकार ने सऊदी अरब से जंग को रोकने के लिए भी कहा था।

सुषमा स्वराज
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उन्होंने अपनी कूटनीति से सऊदी अरब को जंग रोकने के लिए राजी भी कर दिया है. उनकी पहल के बाद जंग रुकी. हालात सामान्य हुए और वहां पर फंसे 5 हजार से ज्यादा भारतीयों की वतन वापसी भी हुई. इसे ऑपरेशन राहत का नाम भी दिया गया था।

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